दोस्तों
मैंने अपने पिछले सौरमण्डल से जुड़े Article में आपको हमारी और आपके अस्तित्व से जुड़ी एक मात्र जीवनदायी ग्रह, पृथ्वी से अवगत कराया था, और आप उसी को Journey of World के इस अंक में आगे
बढ़ाते हुए मैं इसकी सम्पूर्ण जानकारी आप तक पहुंचाने का प्रयास करूंगी, क्योंकि हमारी इस Journey का ये सबसे महत्वपूर्ण
पड़ाव है जहां आकार हम मनुष्य अपने-अपने जीवन की ही Journey
शुरू करते हैं, तो आइये अपनी धरती को और नजदीक से जानते हैं|
हमारी
धरती जिसपर वर्तमान में हम मनुष्य एक वृहद परिवार की तरह निवास करते हैं, वो अपने जीवन के 4.54 बिलियन साल पूरे कर चुकी है (रेडियोधर्मी डेटिंग (Radioactivity) और साक्ष्य के अन्य स्त्रोतों के अनुसार) और तब से लेकर आजतक न जाने
कितनी पटकथाएँ हमारी धारा पर लिखी जा चुकी हैं| यही नहीं
हमारी ये धरती न केवल हम मनुष्यों को जीवन देती है अपितु ये अन्य लाखों प्रजातियों
का भी घर है, जहां सभी धरती द्वारा प्रदत्त संसाधनों के आधार
पर अपना-अपना जीवन यापन करते हैं, पर दोस्तों क्या आपको
मालूम है कि कई अरबों वर्ष पूर्व जन्मी हमारी धरती अमूल्य निधियों का भंडार थी और
है भी, लेकिन मनुष्य द्वारा लगातार किए जा रहे प्रकृतिक
संसादनों के दोहन से हमारी पृथ्वी के मौजूदा अस्तित्व पर ही खतरा मंडरा रहा है| मनुष्य के जीवन को जीवित रखने वाले संसाधन धीरे-धीरे या तो लुप्त हो रहे
हैं या लुप्त होने के कागार पर हैं, फिर भी हमारी धरती की Journey जारी है और हमारी धारा की इस Journey को सराहते हुए
इस लेख में आयी मेरी ये निराशा बस हमारे स्वयं के पृथ्वी के प्रति पतित हो चुके
कर्तव्य को चेताने की है, ताकि हम फिर से अपनी धरती को लेकर
सजग हों और इस धरती पर निवास करने वाला प्रत्येक इंसान अपने-अपने कर्तव्यों को
समझते हुए अपना दायित्व निभाये तभी हमारे Journey of World की ये मुहिम सफल होगी,
तो आइये दोस्तों आश्चर्यों से भरी इस धरती के कुछ रोचक तथ्य जानते हैं:
1.
हमारी पृथ्वी
जिसे अँग्रेजी भाषा में ‘Earth’ और Latin भाषा में ‘Terra’ कहते हैं, कि उत्पत्ति संस्कृत भाषा के शब्द प्रीथिवि (Prithivi) से हुई है, जिसका अर्थ है ‘एक विशाल धरा’ और यहाँ ध्यान देने योग्य एक और
बात है, जो निकलकर आती है वो ये है कि इस पृथ्वी का नाम
महाराजा पृथु (Prithu) के नाम पर पृथ्वी रखा
गया, ऐसा हमारे पौराणिक शास्त्र बताते हैं|
2.
हमारी पृथ्वी पर
वैसे तो 71% भाग पानी है, लेकिन जो भू-स्थल
हमारे रहने योग्य है, उनके अनुसार हमाँरी धरती को सात
महाद्वीपों में बाटा गया है (इसमें कुछ मतभेद भी हैं) और ये सात महाद्वीप हैं, अफ्रीका (Africa), अन्टार्टिका (Antarctica), एशिया (Asia), ऑस्ट्रेलिया (ओशीनियाँ), यूरोप (Europe), उत्तरी अमेरिका (North America) और दक्षिणी अमेरिका (South America)|
3.
हमारी पृथ्वी को
अगर हम अन्तरिक्ष से देखें तो ये हमें नीली दिखाई पड़ती है और जिसके कारण इसे Blue Planet भी कहते हैं, जानते
हैं क्यों दोस्तों, क्योंकि इसके 71% भाग पर जल है और जिसका
रंग नीला है, बस इसी वजह से, तो आइये Journey of World के हमारी धरा पर
अविस्थित उन स्त्रोतों के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं, जिनके अनुसार ये धरती महासागरों में बटी है| धरती
पर माजूद जो पाँच महासागर हैं, वो कुछ इस प्रकार हैं:
Ø प्रशांत महासागर (Pacific Ocean)
Ø अंध महासागर (Atlantic Ocean)
Ø हिन्द महासागर (Indian Ocean)
Ø दक्षिण ध्रुवी महासागर (South Antarctic Ocean)
Ø उत्तर ध्रुवी महासागर (North Antarctic Ocean)
इनके अलावा कुछ अन्य छोटे सागर भी धरती पर
हैं जैसे: लाल सागर (Red Sea),
उत्तरी सागर (North Sea), आदि|
4.
हमारी पृथ्वी पर
इन महासागरों के अलावा नदियों की भी जलीय संरचना है,
जो इस जीवनदायी ग्रह पर रहने वालों को जल आपूर्ति करती हैं|
यदि हम वैश्विक दृष्टिकोण से नजर डालें तो प्रत्येक महाद्वीपों के आधार पर हम
नदियों का वर्गिकरण कर सकते हैं:
Ø एशिया- ब्रह्मपुत्र(Brahmaputra), गंगा(Ganga), लेना(Lena), कावेरी(Kaveri),
नर्मदा(Narmada), सिंधु(Indus), सतलज(Sutlej), झेलम(Jhelum), अमूर(Amur),
ह्वाङ्गहो(Huang He), यमुना(Yamuna),
यांत्सी(Yangtze), मेकांग(Mekong) सहित
अन्य नदियां
Ø अफ्रीका – नील(Blue), कांगो(Congo), नाइजर(Niger), जांबेजी(Zambezi)
Ø उत्तर अमेरिका- मिसीसिपी(Mississippi), हडसन(Hudson), डेलावेअर(Delaware), मैकेंज़ी(Mackenzie)
Ø दक्षिण अमेरिका- अमेज़न (Amazon)
Ø यूरोप – वोल्गा(Volga), थेम्स
(Thames)
Ø ऑस्ट्रेलिया- मरे डार्लिंग(Murray
Darling)
5.
हमारी पृथ्वी को
प्रकृति ने अनेकों अनमोल उपहारों से नवाजा है,
जिनमें से धरती पर मौजूद पर्वत शृंखलाएँ ऐसा अनमोल तोहफा हैं जो हम सभी की कुछ न
कुछ देती रहती हैं, इनको भी हम प्रायद्वीपीय आधार पर हम कुछ
इस तरह विभाजित कर सकते हैं:
Ø
एशिया – हिमालय
- हिन्दू कुश
Ø
अफ्रीका – एटलस
Ø
उत्तरी अमेरिका
– राकी
Ø
दक्षिण अमेरिका
– एंडीज़
Ø
यूरोप – आल्पस
6.
इन सबके अलावा
हमारी पृथ्वी को अन्य जिन प्रकृतिक संरचनाओं ने सजाया और संवारा है उनमें हैं, झीलें (Lakes), धाराएँ (Streams), सहायक नदियां(Tributaries), झरना(Waterfall), Drainage Basin, River Delta, वन (Forest), ज्वालामुखी(Volcano), समुंदरी तट(बीच), घाटी(valley), मैदान(Field), आदि|
7.
इने अलावा इस
धरती के भूस्थलों पर जो सबसे ज्यादा अहम हैं,
वो हैं दुनिया के लगभग 195 देश जिनमें हमारी मानवीय सभ्यता निवास करती है और जिनसे
जुड़े तथ्य और रहस्य हमारी Journey of World का अनमोल हिस्सा हैं, जिससे हम आपको आगे अवगत कराते
रहेंगे, तो Journey of World के इस यात्रा से जुड़े रहिए और अपने दुनिया को
जानने की जिजीविषा को कायम रखिए, क्योंकि अभी तो ये शुरुआत
है, आगे बहुत कुछ है.....

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